राज्य व्यवस्थापिका (विधायिका- Legistature) | Rajasthan GK | State legislature | Rclipse - Education Point

राज्य व्यवस्थापिका (विधायिका- Legistature) | Rajasthan GK | State legislature


-ः राज्य व्यवस्थापिका (विधायिका- Legistature):-

  • राज्य की विधायी शक्ति (कानून निर्माण की शक्ति) राज्य विधान मण्डल में निहित है।
  • प्रत्येक राज्य में एक विधानमण्डल है। अधिकांश राज्यों (22) में एक सदनीय विधानमण्डल (विधानसभा) और द्वितीय सदन (उच्च सदन) को विधान परिषद् के नाम से सम्बोधित किया जाता है। प्रत्येक राज्य का विधानमण्डल राज्यपाल तथा एक या दो सदनों से मिलकर बनता है।
  • राजस्थान का विधान मण्डल एक सदनीय (केवल विधानसभा) है। देश के 6 राज्यों - जम्मू-कश्मीर, उतर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र उपं आंध्रप्रदेश के विधान मण्डल द्विसदनीय (विधानसभा एवं विधान परिषद्) है। आन्ध्रप्रदेश में राज्य विधायिका के द्वितीय सदन विधान परिषद् का कुछ समय पूर्व मंे ही गठन किया गया है।

राज्यपाल:
  • एकीकरण के बाद राजस्थान में राजप्रमुख का पद सृजित किया गया था। राज्य के पहले व एकमात्र राजप्रमुख 30 मार्च, 1949 को जयपुर के भूतपूर्व महाराज सवाई मानसिंह बनाए गए, जिन्होंने 1 नवम्बर, 1956 तक कार्य किया। राजस्थान में 1 नवम्बर, 1956 को राज्य के पुनर्गठन के बाद राजप्रमुख के स्थान पर राज्यपाल का पद सृजित हुआ। राज्य के प्रथम राज्यपाल सरदार गुरूमुख निहालसिंह बने।
  • राज्यपाल राज्य का संवैधानिक मुखिया होता है। राज्य की समस्त कार्यपालिका व विधायी शक्तियां राज्यपाल में निहित होती है। वह राज्य का प्रथम नागरिक है। राज्य सरकार के सभी कार्य राज्यपाल के नाम से किये जाते है।
  • नियुक्ति: राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

योग्यताएं :
  • वह भारत का नगारिक हो एव ंकम से कम 35 वर्ष का हो।
  • वह केन्द्र या राज्य विधायिका का सदस्य न हो। यदि वह सदस्य है जो राज्यपाल का पद ग्रहण करते ही उसका पद रिक्त माना जाएगा।
  • वह किसी लाभ के पद पर नियुक्त न हो।
शपथ: राज्यपाल को सम्बन्धित राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश अथवा उसकी अनुपस्थिति की दशा में वरिष्ठतम न्यायाधीन पद की शपथ दिलाता है।

कार्यकाल: राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसदपर्यन्त अपना पद धारण करता है, लेकित सामान्यतः कार्यकाल पांच वर्ष का होता है।

त्यागपत्र: राज्यपाल राष्ट्रपति को अपना लिखित व हस्ताक्षरित त्यागपत्र पे्रषित कर पदमुक्त हो सकता है।

शक्तियां:
  • विधानसभा का अधिवेशन आहूत करने, सत्रावसान करने एवं विधानसभा का विघटन करने की शक्ति प्राप्त है।
  • विधानमण्डल द्वारा पारित विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ही कानून का रूप लेते है। राज्यपाल पारित विधेयक पर अनुमति देने से इंकान करते हुए विधानमण्डल को लौटा सकता है या राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भिजवा सकता है।
  • विधानसभा के सत्रावसान के दौरान आवश्यक होने पर राज्यपाल अध्यादेश जारी कर कानून निर्माण कर सकता है।
  • राज्यपाल मृत्युदण्ड को क्षमा नहीं कर सकता परन्तु राज्य की कार्यपालिका शक्ति के अधीन विषय से सम्बन्धित अपराध के लिए दण्डादेश का निलम्बन या कम कर सकता है।
  • राज्यपाल राज्य के महाधिवक्ता, विश्वविद्यालय के कुलपति, लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष व अन्य सदस्यों राज्य निर्वाचन आयुक्त, मुख्य सूचना आयुक्त, राज्य वित्त आयोग, लोकायुक्त आदि महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करता है।
विधानसभा:
प्रत्येक राज्य की विधान सभा के न्यूनतम 60 और अधिकत 500 सदस्य हो सकते है। यह सदस्य राज्य के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से जनता (वयस्क मतदाताओं द्वारा) द्वारा प्रत्यक्ष रूप से बहुमत के आधार पर निर्वाचित होते है।

सदस्यों की योग्यताएं:
  • भारतीय नागरिक हो।
  • कम से कम 25 वर्ष की आयु का हो।
  • उन सब योग्यताओं से युक्त हो, जो संसद विधि द्वारा निर्धारित करें।
  • लाभ का पद धारण न करता हो।
  • विधानसभा का कार्यकाल: प्रथम अधिवेशन की तिथि से 5 वर्ष, लेकिन राज्यपाल इसे पूर्व में भी विघटित कर सकता है।
  • विधानमण्डल के गत सत्र के अंतिम दिन तथा आगामी सत्र की ्रथम बैठक के लिए नियत तिथि के बीच 6 माह से अधिक का अन्तर नहीं हो सकता।
  • विधानसभा की कार्यवाही का संचालन विधानसभा अध्यक्ष (ैचमंामत) द्वारा किया जाता है, जिसका निर्वाचन विधानसभा सदस्यों द्वारा अपने में से ही बहुमत द्वारा किया जाता है। उपाध्यक्ष का निर्वाचन भी विधानसभा सदस्य अपने में से करते है।
  • अध्यक्ष विधानसभा भंग होने के साथ ही अपना पद रिक्त नहीं करता अपितु नई विधानसभा द्वारा नया अध्यक्ष चुन लिए जाने तक अपने पद पर आसीन रहता है।
  • विधानसभा के अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष तथा दोनों की अनुपस्थिति में विधानसभा द्वारा इस प्रयोजन हेतु नियुक्त उसका कोई सदस्य अध्यक्ष पद के कत्र्तव्यों का पालन करेगा।
राजस्थान विधानसभा:
  • राजस्थान में एक सदनीय विधानमण्डल (विधानसभा) है, जो 200 सदस्यीय है
  • विधानसभा का नया भवन वर्ष 2001 में ज्योतिनगर, जयपुर में बनकर तैयार हुआ जिसका लोकार्पण 6 नवम्बर, 2001 को तत्कालीन राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन ने किया।
  • प्रथम विधानसभा के अध्यक्ष: श्री नरोत्तमलाल जोशी थे। इसी विधानसभा के नवम्बर, 1953 में हुए बांसवाडा उपचुनाव में यशोदा देवी (प्रजा समाजवादी पार्टी) राज्य की पहली महिला विधायक थी।
  • पहलीबार में चतुर्थ विधानसभा किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण राष्ट्रपति शासन 13 मार्च, 1967 से 26 अप्रैल, 1967 तक लागू रहा व विधानसभा निलम्बित रही।
  • षष्ठम् विधानसभा में पहली बार गैर कांग्रेसी दल जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत व राज्य में गैर कांग्रेसी सरकार बनी। राज्य मूें पहली बार विधानसभा 5 वर्ष से पहले ही भंग कर दी गई व पहले मध्यावधि चुनाव हुए।

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