सवाई जयसिंह/जयसिंह (Savai Jaisingh/ Jaisingh) | Jaysingh/ Savai Jaysingh | All Rajasthan Gk In hindi | Gk Tricks In Hindi | Rclipse - Education Point

सवाई जयसिंह/जयसिंह (Savai Jaisingh/ Jaisingh) | Jaysingh/ Savai Jaysingh | All Rajasthan Gk In hindi | Gk Tricks In Hindi


सवाई जयसिंह/जयसिंह ॥ (17001743 ई.)

• सवाई जयसिंह का जन्म 3 दिसम्बर, 1688 को हुआ था।
• जयसिंह सात मुगल बादशाहों के समकालीन थे।
• सवाई जयसिंह 12 वर्ष की अवस्था में आमेर के शासक बने।


  • औरंगजेब ने इसकी वीरता व वाक्चातुर्यता को मिर्जा राजा जयसिंह से बढ़कर (सवाया) आँककर इसका नाम 'सवाई जयसिंह रख दिया।
  • जाजऊ का युद्ध 8 जून, 1707 को औरंगजेब की मृत्यु के पश्चात् उसके दो बेटों मुअज्जम व आजम के बीच राजगद्दी के लिए 8 जून1707 को हुए उत्तराधिकार युद्ध में जयसिंह ने आजम का साथ दियायुद्ध में मुअज्जम विजयी हुआ व बहादुरशाह प्रथम के नाम से दिल्ली का शासक बना।
  • मुअज्जम ने आमेर का नाम बदलकर मोमीनाबादइस्लामाबाद रख दिया।
  • मोहम्मदशाह (रंगीला) मुगल सम्राट, जयसिंह को ‘सरमहाराजहाय,राज राजेश्वर श्री राजाधिराज सवाई की पदवी दी।
  • चूड़ामन भरतपुर का जाट शासक, जयसिंह ने इन्हें परास्त किया।
  • बदनसिंह भरतपुर का जाट, शासकजयसिंह ने इन्हें बृजराज की उपाधि दी।
  • हुरड़ा सम्मेलन 17 जुलाई, 1734 में हुरड़ा (भीलवाड़ा) में मराों के
  • आक्रमण को रोकने के लिए राजस्थान के राजपूत शासकों का सम्मेलन
  • बुलवाया। इस सम्मेलन के अध्यक्ष महाराणा जगतसिंह थे।
  • जगतसिंह द्वितीय की पुत्री कृष्णा कुमारी के विवाह को लेकर जयपुर व जोधपुर में संघर्ष हुआ।
  • जगतसिंह ने अपनी पुत्री का रिश्ता जोधपुर नर भीमसिंह से तय किया था परन्त विवाह से पूर्व इनकी
  • मृत्यु हो जाने के कारण उन्होंने कृष्णा कुमारी का रिश्ता जयपुर नरेश जगतसिंह से तय कर दिया।
  • गिंगोली युद्ध का जयपुर के शासक जगतसिंह ने अमीर खाँ पिण्डारी की सहायता से गिंगोली नामक स्थान पर जोधपुर के शासक भीमसिंह को पराजित किया।
  • शाला (जन्तरमन्तर) जयसिंह ने अपने राज्यकाल में देश में पाँच वैधशालाएँ दिल्लीमथुरा बनारस, उज्जैन तथा जयपुर में बनाई थी। जयपुर स्थित वैधशाला सबसे बड़ी व अपने में सम्पूर्ण है। इसमें 12 यन्त्र हैं जिनकी सहायता से प्रतिदिन ज्योतिर्मण्डल की गतिविधि देखी जा सकती है।
  • राम यन्त्र सवाई जयसिंह द्वारा 1734 ई. में निर्मित पाँच वैधशालाओं में सबसे बड़ी वैधशाला जन्तर-मन्तर में स्थित थी जिसमें ऊँचाई मापने हेतु इस यन्त्र का प्रयोग किया जाता था।
  • सम्राट यन्त्र जयसिंह द्वितीय ने सूर्य की गणनाओं के लिए सम्राट यन्त्र का निर्माण करवाया जो विश्व की सबसे बड़ी सूर्य घड़ी है। सम्राट यन्त्र से एक सेकण्ड के दसवें हिस्से तक का ठीक-ठीक समय जाना जा सकता है।
  • जयसिंह ने नक्षत्रों की शुद्ध सारणी जीज मोहम्मद शाही) बनवाई।
  • जयसिंह द्वितीय ने 18 नवम्बर1927 को जयपुर नगर की नींव डाली। उनके प्रसिद्ध पण्डित का नाम
  • पण्डित जगद्धनाथ था एवं प्रसिद्ध शिल्पकार विद्याधर भट्टाचार्य बंगाली इंजीनियर) थे, इन्होंने जयपुर नगर को सुनियमित और सुनियोजित ढंग से बसाने में महती भूमिका निभाई। जयपुर शहर के डिजाइन हेतु इटली से भी वास्तुकार बुलाए गए थे। जयपुर के निर्माण का कार्य 1729 ई. में पूर्ण हुआ।

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