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Collector (जिलाधीश) Rajasthan GK || Notes For PTET Rajasthan GK


-ः जिलाधीश (Collector):-

जिलाधीश जिला स्तरीय प्रशासन का प्रधान होता है। वे जिले में कानून एवं व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ विभिन्न विकास कार्य एम राजस्व मामलों की देखरेख भी करता है। जिलाधीश जिला प्रशासन का प्रमुख होता है। जिला स्तर पर वह राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व करता है तथा राज्य सरकार की आंख, कान तथा बाहों की भाति कार्य करता है।

राजस्थान के समस्त जिलों को उपखंड में विभाजित किया गया है। प्रत्येक उपखण्ड एक उपखंड अधिकारी के अधीन होता है। उपखंड अधिकारी अपने के प्रशासन से संबंधित लगभग सभी महत्वपूर्ण कार्यों का संपादन जिलाधीश के निर्देशन में करते हैं।

उपखंड स्तर के नीचे राजस्व प्रशासन हेतु राज्य में प्रत्येक उपखण्ड को तहसीलों में बाटा गया है। तहसीलों का प्रमुख अधिकारी तहसीलदार होता है। तहसीलदार की नियुक्ति राजस्व मंडल द्वारा की जाती है।

Rajasthan High Court Hindi || Rajasthan GK || PTET Notes For GK


: उच्च न्यायालय (High Court) : 

राज्य उच्च न्यायालय किसी राज्य की सर्वोच्च न्यायिक सत्ता होती है। राज्य के प्रमुख न्यायाधीश की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश तथा संबंधित राज्य के राज्यपाल से परामर्श करने के उपरांत की जाती है। किंतु अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश संबंधित राज्य के राज्यपाल व उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की सलाह पर की जाती है। प्रत्येक राज्य के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था है परंतु दो या अधिक राज्यों के लिए एक उच्च न्यायालय की व्यवस्था भी की जा सकती है। यदि वे राज्य ऐसा चाहें, जैसे पंजाब, हरियाणा व चंडीगढ़ का एक ही उच्च न्यायालय है एवं पूर्वोत्तर के 7 राज्यों का एक ही उच्च न्यायालय गुवाहाटी में है। उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की योग्यताएं :

1. भारत का नागरिक हो।
2. कम से कम 10 वर्षों तक न्यायिक पद पर कार्य करने अथवा कम से कम 10 वर्षों तक उच्च न्यायालय में वकील के रूप में कार्य करने का अनुभव हो।

कार्य अवधि : 62 वर्ष की आयु तक त्याग पत्र राष्ट्रपति को लिखित एवं हस्ताक्षर भी त्यागपत्र देकर अपने पद से मुक्त हो सकते हैं।

पद मुक्ति : केवल अक्षमता एवं कदाचार के आरोप में संसद के महाभियोग द्वारा राष्ट्रपति के आदेश से पद मुक्ति।

राजस्थान में न्यायिक व्यवस्था के शीर्ष स्तर पर राजस्थान उच्च न्यायालय है, जिसकी स्थापना संविधान के अनुच्छेद 214 के तहत् 29 अगस्त, 1949 को जयपुर में की गई थी। 1 नवम्बर, 1956 को राज्य पुनर्गठन के बाद गठित सत्यनारायण राव समिति की सिफारिश पर 1958 में उच्च न्यायालय जोधपुर हस्तांतरित कर दिया गया। इसकी एक खंडपीठ (ठमदबी) 31 जनवरी, 1977 को जयपुर में स्थापित की गई।

राज्य व्यवस्थापिका (विधायिका- Legistature) | Rajasthan GK | State legislature


-ः राज्य व्यवस्थापिका (विधायिका- Legistature):-

  • राज्य की विधायी शक्ति (कानून निर्माण की शक्ति) राज्य विधान मण्डल में निहित है।
  • प्रत्येक राज्य में एक विधानमण्डल है। अधिकांश राज्यों (22) में एक सदनीय विधानमण्डल (विधानसभा) और द्वितीय सदन (उच्च सदन) को विधान परिषद् के नाम से सम्बोधित किया जाता है। प्रत्येक राज्य का विधानमण्डल राज्यपाल तथा एक या दो सदनों से मिलकर बनता है।
  • राजस्थान का विधान मण्डल एक सदनीय (केवल विधानसभा) है। देश के 6 राज्यों - जम्मू-कश्मीर, उतर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र उपं आंध्रप्रदेश के विधान मण्डल द्विसदनीय (विधानसभा एवं विधान परिषद्) है। आन्ध्रप्रदेश में राज्य विधायिका के द्वितीय सदन विधान परिषद् का कुछ समय पूर्व मंे ही गठन किया गया है।

राज्यपाल:
  • एकीकरण के बाद राजस्थान में राजप्रमुख का पद सृजित किया गया था। राज्य के पहले व एकमात्र राजप्रमुख 30 मार्च, 1949 को जयपुर के भूतपूर्व महाराज सवाई मानसिंह बनाए गए, जिन्होंने 1 नवम्बर, 1956 तक कार्य किया। राजस्थान में 1 नवम्बर, 1956 को राज्य के पुनर्गठन के बाद राजप्रमुख के स्थान पर राज्यपाल का पद सृजित हुआ। राज्य के प्रथम राज्यपाल सरदार गुरूमुख निहालसिंह बने।
  • राज्यपाल राज्य का संवैधानिक मुखिया होता है। राज्य की समस्त कार्यपालिका व विधायी शक्तियां राज्यपाल में निहित होती है। वह राज्य का प्रथम नागरिक है। राज्य सरकार के सभी कार्य राज्यपाल के नाम से किये जाते है।
  • नियुक्ति: राज्यपाल की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।

योग्यताएं :
  • वह भारत का नगारिक हो एव ंकम से कम 35 वर्ष का हो।
  • वह केन्द्र या राज्य विधायिका का सदस्य न हो। यदि वह सदस्य है जो राज्यपाल का पद ग्रहण करते ही उसका पद रिक्त माना जाएगा।
  • वह किसी लाभ के पद पर नियुक्त न हो।
शपथ: राज्यपाल को सम्बन्धित राज्य के उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश अथवा उसकी अनुपस्थिति की दशा में वरिष्ठतम न्यायाधीन पद की शपथ दिलाता है।

कार्यकाल: राज्यपाल राष्ट्रपति के प्रसदपर्यन्त अपना पद धारण करता है, लेकित सामान्यतः कार्यकाल पांच वर्ष का होता है।

त्यागपत्र: राज्यपाल राष्ट्रपति को अपना लिखित व हस्ताक्षरित त्यागपत्र पे्रषित कर पदमुक्त हो सकता है।

शक्तियां:
  • विधानसभा का अधिवेशन आहूत करने, सत्रावसान करने एवं विधानसभा का विघटन करने की शक्ति प्राप्त है।
  • विधानमण्डल द्वारा पारित विधेयक राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद ही कानून का रूप लेते है। राज्यपाल पारित विधेयक पर अनुमति देने से इंकान करते हुए विधानमण्डल को लौटा सकता है या राष्ट्रपति के पास विचारार्थ भिजवा सकता है।
  • विधानसभा के सत्रावसान के दौरान आवश्यक होने पर राज्यपाल अध्यादेश जारी कर कानून निर्माण कर सकता है।
  • राज्यपाल मृत्युदण्ड को क्षमा नहीं कर सकता परन्तु राज्य की कार्यपालिका शक्ति के अधीन विषय से सम्बन्धित अपराध के लिए दण्डादेश का निलम्बन या कम कर सकता है।
  • राज्यपाल राज्य के महाधिवक्ता, विश्वविद्यालय के कुलपति, लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष व अन्य सदस्यों राज्य निर्वाचन आयुक्त, मुख्य सूचना आयुक्त, राज्य वित्त आयोग, लोकायुक्त आदि महत्त्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति करता है।
विधानसभा:
प्रत्येक राज्य की विधान सभा के न्यूनतम 60 और अधिकत 500 सदस्य हो सकते है। यह सदस्य राज्य के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों से जनता (वयस्क मतदाताओं द्वारा) द्वारा प्रत्यक्ष रूप से बहुमत के आधार पर निर्वाचित होते है।

सदस्यों की योग्यताएं:
  • भारतीय नागरिक हो।
  • कम से कम 25 वर्ष की आयु का हो।
  • उन सब योग्यताओं से युक्त हो, जो संसद विधि द्वारा निर्धारित करें।
  • लाभ का पद धारण न करता हो।
  • विधानसभा का कार्यकाल: प्रथम अधिवेशन की तिथि से 5 वर्ष, लेकिन राज्यपाल इसे पूर्व में भी विघटित कर सकता है।
  • विधानमण्डल के गत सत्र के अंतिम दिन तथा आगामी सत्र की ्रथम बैठक के लिए नियत तिथि के बीच 6 माह से अधिक का अन्तर नहीं हो सकता।
  • विधानसभा की कार्यवाही का संचालन विधानसभा अध्यक्ष (ैचमंामत) द्वारा किया जाता है, जिसका निर्वाचन विधानसभा सदस्यों द्वारा अपने में से ही बहुमत द्वारा किया जाता है। उपाध्यक्ष का निर्वाचन भी विधानसभा सदस्य अपने में से करते है।
  • अध्यक्ष विधानसभा भंग होने के साथ ही अपना पद रिक्त नहीं करता अपितु नई विधानसभा द्वारा नया अध्यक्ष चुन लिए जाने तक अपने पद पर आसीन रहता है।
  • विधानसभा के अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष तथा दोनों की अनुपस्थिति में विधानसभा द्वारा इस प्रयोजन हेतु नियुक्त उसका कोई सदस्य अध्यक्ष पद के कत्र्तव्यों का पालन करेगा।
राजस्थान विधानसभा:
  • राजस्थान में एक सदनीय विधानमण्डल (विधानसभा) है, जो 200 सदस्यीय है
  • विधानसभा का नया भवन वर्ष 2001 में ज्योतिनगर, जयपुर में बनकर तैयार हुआ जिसका लोकार्पण 6 नवम्बर, 2001 को तत्कालीन राष्ट्रपति श्री के.आर. नारायणन ने किया।
  • प्रथम विधानसभा के अध्यक्ष: श्री नरोत्तमलाल जोशी थे। इसी विधानसभा के नवम्बर, 1953 में हुए बांसवाडा उपचुनाव में यशोदा देवी (प्रजा समाजवादी पार्टी) राज्य की पहली महिला विधायक थी।
  • पहलीबार में चतुर्थ विधानसभा किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के कारण राष्ट्रपति शासन 13 मार्च, 1967 से 26 अप्रैल, 1967 तक लागू रहा व विधानसभा निलम्बित रही।
  • षष्ठम् विधानसभा में पहली बार गैर कांग्रेसी दल जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत व राज्य में गैर कांग्रेसी सरकार बनी। राज्य मूें पहली बार विधानसभा 5 वर्ष से पहले ही भंग कर दी गई व पहले मध्यावधि चुनाव हुए।

राजस्थान के जिलों की आकृतियों की समानता (Rajasthan Me Jilo Ki Aakriti) || राजस्थान के जिलों की आकृति (Rajasthan Ke Jilo Ki Aakriti) || Rajasthan Ke Jhilo Ki Aakriti



राजस्थान के जिलों की आकृति


  • अजमेर : त्रिभुजाकार
  • भीलवाड़ा :आयताकार
  • चित्तौड़गढ़ : घोड़े की नाल की समान
  • उदयपुर : ऑस्ट्रेलिया के समान
  • जालौर : व्हेल मछली के समान
  • राजसमंद : तिलक के समान
  • जैसलमेर : सप्तबहुभुजाकार
  • जोधपुर : मयूर आकार
  • सीकर : प्यालानुमा अर्धचंद्राकार
  • टोंक : पतंग आकार


राजस्थान में सूती वस्त्र उद्योग (Cotton Textile Industry In Rajasthan) | Rajasthan Me Suti Vastra Udhog || SSC || IBPS || RPSC



राजस्थान में सूती वस्त्र उद्योग
(Cotton Textile Industry In Rajasthan)


राजस्थान में कृषि पर आधारित उद्योगों में सूती वस्त्र उद्योग प्रमुख है। राजस्थान निर्माण के समय यहाँ सूती कपड़े की कुल 7 मिलें थीं। जो मार्च 1990 में 34 तक हो गई किन्तु 2001 में घटकर इनकी संख्या 22 ही रह गई। सूती वस्त्र से ही जुड़ी धागा बनाने वाली मिल , जिनकी संख्या 50 है। वास्तव में वर्ष 2009-10 में राज्य में सूती वस्त्र निर्माण विषयक 68 कारखाने हैं।

राज्य में प्रथम सूती कपड़ा मिल 1889 में ‘दी कृष्णा मिल्स लिमिटेड' के नाम से ब्यावर में स्थापित की गई। वर्ष 1906 में ब्यावर में ही दूसरी और 1955 में यहाँ तीसरी मिल स्थापित की गई। इस प्रकार ब्यावर सूती वस्त्र उद्योग का केन्द्र बन गया। वर्ष 1988 में भीलवाड़ा में, 1942 में पाली में तथा 1946 में श्रीगंगानगर में सूती वस्त्र मिलें स्थापित की गईं। स्वतन्त्रता के पश्चात्सूती वस्त्र उद्योग का पर्याप्त विस्तार हुआ। कोटा, भीलवाड़ा, किशनगढ़, जयपुर, उदयपुर, गंगापुर, बांसवाड़ा, आबूरोड, अलवर, गुलाबपुरा, भवानीमण्डी, जोधपुर आदि नगरों में सूती वस्त्र मिलें स्थापित की गईं। आज यावर, किशनगढ़, भीलवाड़ा, पाली, उदयपुर, श्रीगंगानगर, कोटा, सूती वस्त्र उद्योग के प्रमुख केन्द्र हैं। फरवरी 2009 में केन्द्र सरकार ने भीलवाड़ा को वस्त्र निर्यातक नगर का दर्जा दिया है।

राज्य में स्थापित अधिकांश मिलों की मशीनें पुरानी हो जाने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है। यद्यपि आधुनिकीकरण के उपाय किए जा रहे हैं, किन्तु वे सीमित हैं। राज्य में सूती धागे एवं सूती वस्त्र का उत्पादन वर्ष 2009-10 में क्रमशः 1058 लाख किग्रा एवं 498 लाख मी का उत्पादन किया गया। राज्य में निजी क्षेत्र की 17 सूती वस्त्र मिलें कार्यरत हैं।

राजस्थान में सीमेंट उद्योग (Cement Industry in Rajasthan) || Rajasthan Me Cement Udhog || SSC || IBPS || RPSC



राजस्थान में सीमेंट उद्योग
(Cement Industry in Rajasthan)


राजस्थान में सीमेन्ट उद्योग का समुचित विकास हुआ है और भावी विकास की सम्भावना भी है, क्योंकि उसके लिए आवश्यक कच्चा माल चूने का पत्थर (लाइम स्टोन) यहाँ प्रचुरता में उपलब्ध है। एक टन सीमेन्ट तैयार करने में लगभग 1.6 टन चूने के पत्थर की आवश्यकता होती है। इसके अतिरिक्त जिप्सम भी यहाँ उपलब्ध है। कोयला अवश्य बाहर से आयात करना होता है। राज्य में प्रथम सीमेन्ट का कारखाना 1915 में लाखेरी (बूंदी) में स्थापित किया गया। वर्तमान में राज्य में सीमेन्ट की 12 बड़ी इकाइयाँ और अनेक लघु प्लाण्ट सक्रिय हैं। आँकड़ों के आधार पर राज्य में 115 लघु सीमेन्ट प्लाण्ट स्थापित किए गए जिनकी संयुक्त क्षमता 6 लाख टन है, किन्तु इनमें से अनेक अब बन्द हो चुके हैं। राज्य के सीमेन्ट कारखानों में सर्वाधिक क्षमता जे.के. सीमेन्ट (निम्बाहेड़ा) की तथा न्यूनतम श्री राम सीमेन्ट (कोटा) की है।

राज्य में सीमेन्ट निर्माण के प्रमुख कारखाने
  • ए.सी.सी.लि. लाखेरी (बूंदी) 1971 में स्थापित
  • जयपुर उद्योग, सवाई माधोपुर (बन्द पड़ा है।
  • बिड़ला सीमेन्ट वक्र्स लि. चित्तौड़गढ़।
  • चितौड़गढ़ सीमेन्ट वक्र्स लि. चित्तौड़गढ़ (चेतक छाप)
  • मंगलम सीमेन्ट, मोडक (कोटा) बिड़ला
  • श्री सीमेन्ट ब्यावर (श्रीछाप)
  • जे.के, सीमेन्ट लि (जे.के. छाप) (निम्बाहेड़ा)
  • स्ट्रा प्रोडक्ट्स बनास सिरोही)
  • श्रीराम सीमेन्ट, श्री रामनगर (कोटा)
  • बिड़ला व्हाइट सीमेन्ट, गोटन
  • हिन्दुस्तान सीमेन्ट, उदयपुर
  • राजश्री सीमेन्ट, खारिया, मीरापुर (नागौर)

राज्य में सीमेन्ट उत्पादन की स्थिति


सन् 1951 में राज्य में सीमेन्ट उत्पादन के दो कारखाने लाखेरी (बूंदी) व सवाई माधोपुर में थे जिनमें प्रतिवर्ष 25 लाख टन सीमेन्ट उत्पादन होता था। इनके बाद राज्य में अनेक सीमेन्ट उत्पादन कारखाने स्थापित हुए जिससे सन् 2000 में सीमेन्ट उत्पादन बढ़कर 92 लाख टन हो गया। राजस्थान खनिज विभाग तीन और जिलों में सीमेन्ट उत्पादन के 10 लाइम स्टोन ब्लॉक्स लगाने की तैयारी कर रहा है। इससे प्रदेश के सीमेन्ट उत्पादन में करीब 25 मिलियन टन की बढ़ोतरी हो जाएगी। अभी प्रदेश में सीमेन्ट उत्पादन के 15 प्लाण्ट लगे हुए हैं, जिनसे 43 मिलियन टन सीमेन्ट का उत्पादन हो रहा है। विभाग जैसलमेर में 6, चित्तौड़गढ़ और नागौर में 2-2 ब्लॉक्स खोलने की तैयारी कर रहा है।